मंगलवार, 17 जून 2014

बेतिया दुर्गाबाग के यात्री सुविधाओं के विकास में अपना योगदान करें


भारतवर्ष के बिहार राज्य के पच्छिम चम्पारण के मुख्यालय स्थित बेतिया शहर का गौरव, देवासुर संग्राम मे देवताओ के बिजय का प्रतिक चिन्ह,अनेको ऋषियोँ व राजबंशो का गौरव गाथा अपने मे समेटे यह नागर शैली की अनुपम कृती एवं प्रतीदिन अर्थाभाव एवं समय के थपेड़ो से घायल सार्वजनिक शोषण का शिकार यह दुर्गाबाग मन्दिर आज कोर्ट ऑफ वाड्स के अधिन अपने उद्धारक एवं सहयोगीयोँ की बाट जोह रहा है,1500 रुपया से अधिक या ८० घंटा बार्षिक श्रम   सहयोग  देसकने मे सक्षम भक्त स्थाई सहयोगी सुची मेँ अपना नाम अवश्य दर्ज करावेआपके जनसहयोग से ही ये कार्य सम्पन्न कराये जाएंगे, 1:-"मन्दिर मरम्मती व सौन्दर्य करण व रंग-रोगन" का कार्य
2:-"
मंदिर के 11एकड़ 60डिसमिल भुखण्ड की चरदिवारी निर्माण", आठ गेट व फाटक निर्माण, मंदिर मे विशेष अवसरो पर उमड़ने वाली अनियंत्रित भीड़ को नियंत्रित व पंक्तिब्द्ध करने के लिए मंदिर के तालाब के पास के अति प्राचीन महाकाल के मंदिर से गणेश जी के मंदिर तक ओभर ब्रिज का निर्माण की व्यवस्था 
3:- हनुमान मंदिर के पूरब वाले भूखंड मे " बाहन पार्किँग,अष्टयाम स्थल,  खान-पान स्थलछेका स्थल,यात्रीपड़ाव,सार्बजनिक शौचालय तथा स्नानस्थल निर्माण":-" व बैठका की व्यवस्था
4:-बाहरी तीर्थ-यात्रियों व अतिथियों के सुविधार्थ "36
पलैट अत्याधुनिक सुबिधाओ से लैस धर्मशाला निर्माण तथा प्रवचन स्थल निर्माण आज अविलंब नितांत है 
आप-सब अपना सहयोग स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया बेतिया में खाता संख्या  1111597812-7 पर  राकेश चन्द्र झा बब्लू,(संचालक पुजारी) के नाम से या सीधे सम्पर्क करके प्रदान कर मन्दिर सहयोगी सूचि में अपना नाम अवश्य दर्ज कराए या दान पात्र मे गुप्त-दान करे
अधिक जानकारी के लिए फोन करे 06254238572 
या +919431491033(आपके द्वारा दिया गया चंद सहयोग हिं यहाँ खोलेगा विकाश व सौनदर्यीकरन का बंद दरवाजा) 

गुरुवार, 12 जून 2014

घोटाले बाजी व भरष्टाचार मी लिप्त राज कार्यालय की जांच हो

सूचना अधिकार से प्राप्त दस्तावेज से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि बिहार के इतिहास के पहले सरकारी खजाना घोटाले के अभियुक्तों की जब्त की गई सैकड़ों एकड़ जमीन के कागज़ात भूमाफियाओं ने गायब कर दिये हैं.लूट के इस खेल में बड़े नौकरशाहों से लेकर छोटे बाबू भी शामिल हैं पर कार्रवाई नदारद है. मोतिहारी से गजाला इन्तेजार की खास रिपोर्ट करीब तीन सौ एकड़ जमीन का रिकार्ड पूर्वी चम्पारण जिला अभिलेखागारों में नहीं है. इस जमीन का रिकार्ड आकाश में उड़ गया या पताल में चला गया, प्रशासन इस मामले में अभी तक अंजान है. जानकार बताते है कि पश्चिम चम्पारण के बेतिया राज में 1940 के दशक में देश का सब से बड़ा सरकारी खजाना घोटाला हुआ था. उक्त घोटाला कांड में सजायाफ्ता पांच अभियुक्तों की जमीन जब्त कर उसकी निलामी कर सरकारी कोष में पैसों को जमा किया गया था.

1937-38 के उक्त घोटाले के मुकदमे की सुनवाई मुजफ्फरपुर जिला सत्र न्यायाधीश के कोर्ट में हुई थी. अभियुक्त जिला कोषागार के कर्मचारी थे और बोरों में भरकर उस दौर में लगभग तीन लाख रूपये की अवैध निकासी कर जमीन खरीदी थी. न्यायालय के आदेश से तत्कालीन बेतिया राज, जो कोर्ट ऑफ वाट्स यानी पूरी तरह से ब्रिटीश सरकार के अधीन था, ने अभियुक्तों पर सर्टीफिकेट केसनंबर 240237-38 चलाकर उनकी तमाम अचल संपत्ति को निलाम किया था. अनुमानतः तीन सौ एकड़ जमीन उक्त मुकदमे में निलाम कर नीलाम खरीदारी को बेतिया राज ने दखल दहानी कराया था. निलामी प्रक्रिया चंद वर्षों तक चली थी. नीलाम एवं दखलदहानी की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद तामम खरीददारों के नाम उक्त जमीन का हस्तांतरण राज द्वारा कर दी गयी. गुलामी काल में ब्रिटीश हुकूमत के दौर में की गयी उक्त कार्यवाही, उस दौर में देश की बड़ी घटना थी. बिहार में सरकारी खजाना घोटाला की प्रथम घटना थी. उक्त मुकदमे की कार्यवाही और निलामी प्रक्रिया के तमाम रिकार्ड अभिलेखागार में रखे गये. तत्कालीन चम्पारण में दो अभिलेखागार थे तथा वर्तमान समय में भी दो है. एक बेतिया राज अभिलेखागार तथा दूसरा मोतिहारी समाहरणालय अभिलेखागार. वर्तमान समय भूमाफियाओं ने अभिलेखागारों से उक्त स्थाई रिकार्ड की हेराफेरी कर उसे या तो खरीद लिया है या अन्यत्र जगह रखवा कर जमीन पर कब्जा कर लिया है. न्यायालय तक साक्ष्य नहीं पहुंचे इसका मुकम्मल बन्दोबस्त कर विवाद को बड़े ही ही सुनियोजित ढंग से अपने पक्ष में करने का खेल जारी है. उक्त निलामी मुकदमे के अन्तर्गत मोतिहारी के बैंक रोड पर काफी जमीन है. वर्तमान एवं पर्वू एलआईसी नर्सरी, खोदानगर, धर्मसमाज रोड़, मठिया, पतौरा, बंगरी, सिकटा,मोतिहारी मुख्य पथ पर एवं अन्य स्थानों पर सैकड़ों एकड़ जमीन है. इस अति महत्वपूर्ण जमीन नीलामी के कागजात की मांग सूचना के अधिकार कानून के तहत की गयी लेकिन मोतिहारी अभिलेखागार एवं बेतिया राज अभिलेखागार को निर्देश देकर महा अभिलेखागार एवं बिहार सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया. सूचना अधिकार के तहत कुछ जमीन के निलामी सर्टीफिकेट की प्रति मांगी गयी थी परंतु टाल मटोल कर इस अति महत्वपूर्ण मामले को छोड़ दिया गया.तमाम पूर्व के रिकार्ड देश एवं राज्य की संपत्ति होते हैं. इस संपत्ति की निगरानी एवं रख रखाव पर सरकार काफी पैसा वेतन मद में देती है. अगर रखवाले ही उक्त अनमोल धरोहर एवं रिकार्ड की बिक्री या हेराफेरी करने लगें तो ऐसी व्यवस्था को क्या कहेंगे.सरकारी खजाना कांड संख्या 240/37-38 का स्थाई रिकार्ड नही मिलना चिंता का विषय बना हुआ है. इस रिकार्ड की जरूरत दोनो जिलों के हजारो लोगों को है. मोतिहारी के रिकार्ड रूम में कई सूची रिकार्ड सूची रजिस्टर गायब हैं यह जांच का विषय है.